ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताई नाराजगी, मेल-इन बैलेट नियमों पर लगा ब्रेक

ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताई नाराजगी, मेल-इन बैलेट नियमों पर लगा ब्रेक





वॉशिंगटन: अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले मेल-इन वोटिंग को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट के बीच कानूनी टकराव सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी, जिसके तहत डाक से भेजे जाने वाले बैलेट पर नए नियम लागू किए जाने थे। फैसले के बाद ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?



14 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत द्वारा रोके गए नए मेल-बैलेट नियमों को चुनाव से पहले लागू करने की मांग की गई थी।
कोर्ट के संक्षिप्त आदेश के मुताबिक सरकार अपनी चुनौती में सफल होने की संभावना नहीं दिखा सकी। इसके परिणामस्वरूप 2026 के मिडटर्म चुनावों में प्रस्तावित नए नियम लागू नहीं हो पाएंगे।
यह आदेश फिलहाल आगामी 2026 चुनावों पर लागू होने वाले बदलावों तक सीमित है। मामले से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर आगे निचली अदालतों में सुनवाई जारी रह सकती है।



ट्रंप प्रशासन क्या बदलाव चाहता था?



विवाद मार्च 2026 में जारी ट्रंप प्रशासन के एक आदेश के बाद शुरू हुआ था। प्रस्तावित व्यवस्था में मेल-बैलेट की प्रक्रिया में अतिरिक्त जांच और डाक व्यवस्था से जुड़े नए प्रावधान शामिल किए गए थे।
योजना के तहत राज्यों को कुछ मतदाताओं की पात्रता संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने और बैलेट लिफाफों के लिए निर्धारित बारकोड व्यवस्था का इस्तेमाल करने जैसे नियमों का सामना करना पड़ता।
प्रशासन का तर्क था कि इन उपायों से चुनावी प्रक्रिया में सुरक्षा और निगरानी बेहतर हो सकती है। दूसरी ओर, कई राज्यों और मतदान अधिकार संगठनों ने इसका विरोध किया और कहा कि चुनाव से कुछ ही समय पहले व्यवस्था बदलने से मतदान प्रक्रिया में व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।


फैसले के बाद ट्रंप की प्रतिक्रिया



सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अगले दिन ट्रंप ने अदालत के फैसले पर नाराजगी जताई। Reuters के मुताबिक, उन्होंने उन सुप्रीम कोर्ट जजों की भी आलोचना की जिन्हें उन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में नियुक्त किया था।
ट्रंप ने फैसले को रिपब्लिकन पार्टी के लिए नुकसान के रूप में बताया और कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठाए। वहीं, प्रशासन के अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने संकेत दिया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेगी।


किन जजों ने असहमति जताई?



सुप्रीम कोर्ट के आदेश में जस्टिस सैमुअल अलिटो और जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने असहमति जताई।
इसके विपरीत, जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने अलग राय लिखते हुए कहा कि उनके विचार में कुछ परिस्थितियों में पोस्टल सर्विस के पास नियम बनाने का वैधानिक अधिकार हो सकता है, लेकिन 2026 के चुनाव के इतने करीब इसे लागू करना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं होगा क्योंकि राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं था।


आगे क्या हो सकता है?



सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश 2026 के मिडटर्म चुनावों के लिए प्रस्तावित बदलावों को लागू होने से रोकता है, लेकिन इससे जुड़े सभी कानूनी विवाद समाप्त नहीं हुए हैं।
मामला निचली अदालतों में आगे बढ़ सकता है और भविष्य के चुनावों में ऐसे नियमों को लागू करने की कोशिश फिर कानूनी जांच के दायरे में आ सकती है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, मेल वोटिंग को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति और चुनाव प्रक्रिया पर संघीय सरकार की भूमिका आने वाले समय में भी कानूनी बहस का विषय बनी रह सकती है।


निष्कर्ष



अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले मेल-इन बैलेट नियमों में तत्काल बदलाव की ट्रंप प्रशासन की कोशिश पर रोक लगा दी है। फैसले के बाद ट्रंप और अदालत के बीच सार्वजनिक मतभेद भी सामने आए हैं।
अब मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि निचली अदालतों में इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है और भविष्य के अमेरिकी चुनावों में मेल-इन वोटिंग के नियमों को लेकर क्या बदलाव प्रस्तावित किए जाते हैं।






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